Tuesday, 2 October 2012

My Thoughts

This one is mine... just thought I will also give a try!!

मै अक्सर परेशान रहता हूँ !

मंजिल्लोंकी तलाश में , ज़िन्दगी खो रहा हूँ
खुशियोंके गुलशन में , मै रो रहा हूँ !

हर मंजिल की एक ही है मंजिल - जानता हूँ
पर हर दिन नई मंजिल , हर रात नई राह अपनाता हूँ !

जगमगाहट  की दुनिया में , सादगी धुन्ड़ता हूँ
पैसा, शोहरत , कमियाबी जब सबकी पेह्चान हैं
गुमनाम नेकी करके , मैं बेनाम हो रहा हूँ !

क्या मैं सही हूँ , या गलत - इन खयालोंसे बचते
लोगोंके साथ रहता हूँ !
पर भीड़ में भी मैं तनहाई धुन्ड़ता रहता हूँ !

मै अक्सर परेशान रहता हूँ !